
देहरादून: शिक्षक दिवस पर उत्तराखंड के प्राथमिक शिक्षकों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर प्रदेशभर के शिक्षकों ने स्कूलों में काली पट्टी बांधकर आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त करने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग उठाई।
जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र रावत ने कहा कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए उत्तर प्रदेश ने विशेष अध्यापक पात्रता परीक्षा का विज्ञापन जारी किया है। इसी तर्ज पर उत्तराखंड में भी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुराने शिक्षकों की नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य नहीं था। बाद में टीईटी की बाध्यता लागू होने से उन शिक्षकों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है, जिन्होंने वर्षों तक सेवा की है।
रावत ने कहा कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी विशेष टीईटी कराया जाता है तो आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को राहत मिल सकती है। इससे लंबे समय से चले आ रहे इस मामले का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकेगा। उन्होंने सरकार से इस दिशा में जल्द निर्णय लेने की मांग की।
पुरानी पेंशन बहाली की भी उठाई मांग
शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन जरूरी है।



