
देहरादून: कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी एवं सांसद कुमारी सैलजा ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा पर आपत्ति जताई है। उन्होंने रावत को पत्र भेजकर यात्रा के संबंध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष अथवा उनसे चर्चा नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। सैलजा ने स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले पार्टी में किसी भी तरह का समानांतर कार्यक्रम कांग्रेस के हित में नहीं है।
सैलजा ने पत्र में कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि हरीश रावत राज्य में यात्रा कर रहे हैं। इस संबंध में न तो उनसे और न ही पीसीसी अध्यक्ष से चर्चा की गई। उन्होंने रावत की ओर से हाल में दिए गए कुछ बयानों को भी विवादास्पद बताया। सैलजा ने कहा कि चुनाव निकट हैं और पार्टी को एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरना होगा।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कांग्रेस को संगठन मजबूत करने और सामूहिक रूप से चुनाव की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे में अलग से किसी कार्यक्रम का संचालन पार्टी के हित में नहीं होगा। उन्होंने रावत से इन कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने को कहा है। सैलजा के पत्र के बाद कांग्रेस के भीतर समन्वय को लेकर चल रही चर्चाएं फिर सामने आ गई हैं।
रावत बोले- हाथ में तिरंगा है, कार्यक्रम को पार्टी का नहीं बनाया
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से देर रात काफी प्रयास के बाद भी फोन पर संपर्क नहीं हो पाया। हालांकि, इंटरनेट मीडिया में जारी एक पोस्ट में रावत ने कहा कि गंभीर बीमारी से उबरने के बाद वह अपने शुभचिंतकों का आभार जताने के लिए उत्तराखंड आए हैं।
धन्यवाद और जनसंवाद यात्रा को लेकर रावत ने स्पष्ट किया कि उनके हाथ में तिरंगा जरूर है, लेकिन उन्होंने अपने कार्यक्रम को पार्टी का कार्यक्रम नहीं बनाया है। उनके अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता अपने उत्साह और वर्षों के जुड़ाव के चलते इन कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। रावत ने कार्यकर्ताओं की सहभागिता के लिए आभार जताते हुए कहा कि अब उन्हें ईडी और भाजपा से भी लड़ना है।
सैलजा की आपत्ति और रावत के इस स्पष्टीकरण के बाद जनसंवाद यात्रा को लेकर कांग्रेस संगठन और रावत के बीच समन्वय का मुद्दा चर्चा में है।



