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इस साल के अंत तक गंगा पर नजर आएगा थ्री लेन बजरंग सेतु, कांच का होगा फुटपाथ, जानिए और क्या होंगी खूबियां

देहरादून: विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मणझूला सेतु विगत चार वर्षों से आवाजाही के लिए बंद है। इस सेतु के विकल्प के रूप में शीघ्र ही गंगा नदी पर नया थ्री लेन पुल नजर आएगा। इस पुल को बजरंग सेतु नाम दिया गया है। यह पुल, वैश्विक ख्याति प्राप्त लक्ष्मणझूला सेतु का विकल्प बनेगा। इसलिए तो चर्चाओं में है ही, साथ ही यह पुल भारत में इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना होगा। दरअसल, इस पुल के दोनों ओर जो पैदल लेन बनेगी वह पारदर्शी कांच की होगी। वर्तमान में बजरंग सेतु का निर्माण कार्य प्रगति पर है और यह सेतु इस वर्ष के अंत तक अस्तित्व में आ जाएगा।

लक्ष्मणझूला सेतु का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1927 से 29 के बीच गंगा नदी पर तपोवन के नीचे लक्ष्मणझूला के मध्य किया गया था। 12 जुलाई 2019 में लोक निर्माण विभाग की सेफ्टी आडिट रिपोर्ट में इस पुल को असुरक्षित मानते हुए प्रशासन ने इस पुल को आवाजाही के लिए बंद कर दिया था। जिसके बाद से ही लक्ष्मणझूला पुल के नए विकल्प के लिए कसरत शुरू हो गई थी। नए पुल के लिए लोक निर्माण विभाग ने डीपीआर तैयार कर प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्रीय सड़क निधि में स्वीकृति के लिए भेजा था। जिसके बाद इस पुल के लिए कुल 68 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। जिसके लिए पहले चरण में लोक निर्माण विभाग को 18 करोड़ 78 लाख रुपये की राशि भी अवमुक्त की गई थी।

वर्तमान में तपोवन तथा लक्ष्मणझूला दोनों ओर से पुल के आधार तैयार किए जा रहे हैं। इस सेतु के फाउंडेशन लगभग तैयार कर दिए गए हैं। इस वर्ष जुलाई तक पुल का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाना था। मगर, सप्ताहांत पर आने वाली भीड़ और साथ में चार धाम यात्रा के चलते पुल के लिए भवन निर्माण सामग्री को पहुंचाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग की माने तो इस कारण हो रहे विलंब से इस वर्ष के अंत तक बजरंग सेतु का काम पूर्ण कर लिया जाएगा।

133 मीटर लंबा और आठ मीटर चौड़ा होगा बजरंग सेतु

लक्ष्मणझूला पुल के विकल्प के रूप में तैयार किया जा रहा बजरंग सेतु अपने आप में तकनीकी का एक बेजोड़ नमूना होगा। कुल 133 मीटर लंबे और आठ मीटर चौड़ाई वाला यह पुल थ्री लेन का होगा। इस पुल के बीच में छोटे चौपहिया वाहन गुजर सकेंगे। बजरंग सेतु के बीच में ढाई-ढाई मीटर की डबल लेन दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए होगी। पुल के दोनों तरफ 1.5 मीटर का पैदल पथ होगा। यह पैदल पथ कांच का बना होगा। इस कांच की मोटाई 65 मिमी होगी, जो बेहद मजबूत होता है। इस पर खड़े होकर सैलानी 57 मीटर ऊंचाई से गंगा की बहती जलधारा का अद्भुत नजारा देख सकेंगे और इस पर चहलकदमी कर सकेंगे।

केदारनाथ मंदिर की आकृति के होंगे पुल के टावर

बजरंग सेतु के दोनों ओर जो टावर बनाए जा रहे हैं, उनकी ऊंचाई करीब 27 मीटर होगी। इन टावर की विशेषता यह है कि यह टावर केदारनाथ मंदिर की आकृति की तर्ज पर बनाया जाएंगे। जो दूर से देखने में केदारनाथ मंदिर की झलक पेश करेंगे। इस सेतु को स्टेट आफ आर्ट के तौर पर विकसित किया जाएगा, जो अपने आप में अभिनव कलाकृति होगी। जिस तरह लक्ष्मणझूला सेतु कई दशकों तक देश विदेश के पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा, ठीक उसी तरह बजरंग सेतु भी आने वाले समय में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

बजरंग सेतु का काम 50 प्रतिशत पूरा हुआ है। क्षेत्र में यात्रा काल और सप्ताहांत को देखते हुए मालवाहक वाहनों को लाने में परेशानी हो रही है। एक माह के भीतर दोनों किनारों के बीच आधार बनाकर पुल को जोड़ने का काम पूरा हो जाएगा। कोशिश है कि इस वर्ष के अंत तक सभी काम पूरे कर लिया जाए

 

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