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मीटर में शार्ट सर्किट से लगी आग पर यूपीसीएल देगा 2.15 लाख रुपये, उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए 45 दिन में भुगतान के दिए आदेश

देहरादून: बिजली मीटर में शार्ट सर्किट से घर में लगी आग के मामले में उपभोक्ता आयोग ने यूपीसीएल को कुल 2.15 लाख रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।

इसमें दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति, 10 हजार रुपये मानसिक परेशानी व सेवा में कमी तथा पांच हजार रुपये वाद व्यय के शामिल हैं। इसके अलावा दो लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि पर शिकायत दाखिल करने की तारीख 23 जून 2016 से भुगतान होने तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग ने यूपीसीएल को 45 दिन के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

मामला 25 नवंबर 2014 का है। तड़के करीब 3:30 बजे शिकायतकर्ता के घर में लगे बिजली मीटर में शार्ट सर्किट हो गया। इसके बाद आग मीटर की वायरिंग, फ्यूज और डीपी स्विच से होते हुए बरामदे तक फैल गई। आग की चपेट में आने से घर में रखा सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया।
शिकायतकर्ता ने उसी दिन पुलिस, अग्निशमन विभाग और ऋषिकेश स्थित विद्युत वितरण खंड के अवर अभियंता को घटना की सूचना दी।

इसके कुछ दिन बाद लेखपाल ने भी मौके पर पहुंचकर रिपोर्ट तैयार की।
विद्युत निरीक्षक की रिपोर्ट में मीटर के पास शार्ट सर्किट का उल्लेख
मामले में विद्युत निरीक्षक ने 21 मई 2015 को विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 161 के तहत निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में आग की शुरुआत मीटर के पास शार्ट सर्किट से होने की बात कही गई। रिपोर्ट में सर्विस लाइन पर एरियल फ्यूज नहीं होने का भी उल्लेख किया गया था।

यूपीसीएल ने आंतरिक वायरिंग को बताया जिम्मेदार

मामले में यूपीसीएल ने अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया। निगम की ओर से आयोग के समक्ष कहा गया कि आग उसकी सर्विस लाइन में किसी खराबी के कारण नहीं लगी, बल्कि उपभोक्ता के परिसर की आंतरिक वायरिंग में खराबी के कारण हादसा हुआ। निगम ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के उपभोक्ता उपकरणों के रखरखाव से जुड़े नियमों का भी हवाला दिया।

आयोग ने कहा कि यूपीसीएल यह साबित नहीं कर सका कि हादसा केवल उपभोक्ता की आंतरिक वायरिंग में खराबी के कारण हुआ था। वहीं, विद्युत निरीक्षक की रिपोर्ट में सर्विस लाइन पर एरियल फ्यूज नहीं होने की बात सामने आई थी।

सर्विस लाइन सुरक्षित रखना निगम की जिम्मेदारी

आयोग ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के विनियम-13 का हवाला देते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति करने वाले पर उसके नियंत्रण वाली आपूर्ति लाइनों, तारों, फिटिंग और उपकरणों को सुरक्षित स्थिति में बनाए रखने की जिम्मेदारी है।

आयोग ने माना कि यूपीसीएल इस जिम्मेदारी का निर्वहन करने में विफल रहा और इसे सेवा में कमी माना। इसके बाद आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यूपीसीएल को दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति, 10 हजार रुपये मानसिक परेशानी व सेवा में कमी और पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने के आदेश दिए। दो लाख रुपये की क्षतिपूर्ति पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी 23 जून 2016 से भुगतान की तारीख तक देना होगा।

Namaskar Live

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